इमिग्रेशन नियम सख्त, अब पंजाब में ही भविष्य तलाश रहे युवा

कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों की सख्त होती आव्रजन नीतियों ने पंजाब के हजारों युवाओं की विदेश में पढ़ाई और बसने की योजनाओं को बड़ा झटका दिया है। पहले जहां हर साल बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा और बेहतर रोजगार की उम्मीद में विदेश जाते थे, वहीं अब बड़ी तादाद में युवा अपना फैसला बदलकर राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में दाखिला ले रहे हैं। इस रिवर्स माइग्रेशन से पंजाब के शिक्षण संस्थानों में एक बार फिर रौनक लौटती दिखाई दे रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कनाडा में पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) नियमों में सख्ती, ब्रिटेन में पोस्ट-स्टडी वीजा की सीमित अवधि और अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ बढ़ती कार्रवाई ने पंजाबी छात्रों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। कई छात्रों ने ऐसे डिप्लोमा कोर्स में दाखिला लिया, जो वर्क परमिट के लिए मान्य नहीं थे। इसका नतीजा यह हुआ कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद उन्हें न नौकरी मिली और न ही विदेश में रहने का अवसर।
जीएचजी खालसा कॉलेज के प्रिंसिपल इंदरजीत सिंह और माइग्रेशन विशेषज्ञ प्रगट सिंह के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में विदेश भेजने वाले एजेंटों के झांसे में आकर कई परिवारों ने अपनी जीवनभर की कमाई और कर्ज के पैसे निवेश कर दिए। अब वर्क परमिट न मिलने और पढ़ाई पूरी होने के बाद लौटने की मजबूरी से कई परिवार आर्थिक संकट में फंस गए हैं। वहीं बड़ी संख्या में छात्र मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं का भी सामना कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक हाल के समय में हजारों भारतीयों को कनाडा, अमेरिका और अन्य देशों से वापस भेजा गया है। वहीं लाखों छात्रों का भविष्य अब भी अनिश्चित बना हुआ है। कई युवाओं को उम्मीद थी कि पढ़ाई के बाद उन्हें स्थायी निवास और रोजगार मिलेगा, लेकिन बदलती नीतियों ने उनकी योजनाओं पर पानी फेर दिया। इस बदलाव का असर केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका सीधा प्रभाव 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। वर्ष 2022 के चुनाव में बड़ी संख्या में 18 से 19 वर्ष के युवा विदेश में होने के कारण मतदान नहीं कर पाए थे। अब वही युवा और नई जेन-जी पीढ़ी राज्य में मौजूद रहेगी, जिससे पहली बार मतदान करने वालों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकारें युवाओं के लिए रोजगार, उद्योग, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पारदर्शी शासन की दिशा में प्रभावी कदम उठाती हैं तो मतदान प्रतिशत में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इस बार चुनावी बहस में बेरोजगारी, नशा मुक्ति, स्किल डेवलपमेंट और स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दे पहले से कहीं अधिक प्रमुख रह सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सभी युवा पंजाब में ही नहीं रुकेंगे। कुछ छात्र ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जर्मनी या खाड़ी देशों जैसे नए विकल्प तलाश सकते हैं। ऐसे में चुनाव पर वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य सरकार और राजनीतिक दल युवाओं के लिए कितनी भरोसेमंद और व्यावहारिक नीतियां लेकर आते हैं। विशेषज्ञ सतवंत सिंह तलवंडी, राजेश गर्ग, डिंपल खालसा और करमजीत सिंह ने छात्रों को सलाह दी है कि विदेश जाने से पहले केवल अधिकृत सरकारी वेबसाइटों से ही कॉलेज, कोर्स और वर्क परमिट की पात्रता की जानकारी लें। किसी एजेंट के झांसे में आने या भावनाओं में बहकर फैसला लेने के बजाय वास्तविक बजट, रोजगार की संभावनाओं और भविष्य की स्थिति का आकलन करने के बाद ही निर्णय लें। इससे आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।




