डिजिटल कृषि मिशन से किसानों को मिलेगा सीधा फायदा, मुआवजा पहुंचेगा सीधे खाते में

हरियाणा में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) और डिजिटल कृषि मिशन (AgriStack) लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू करा दिया है। इस मिशन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सैटेलाइट तकनीक का उपयोग कर खेतों में बोई गई फसलों और कृषि भूमि के उपयोग का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। परियोजना के पायलट चरण की शुरुआत पंचकूला जिले के टोका गांव से की गई, जहां मास्टर ट्रेनरों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया गया। अब प्रशिक्षण का दूसरा चरण यमुनानगर जिले के जगाधरी स्थित तिगरी टोडरपुर गांव में आयोजित किया जा रहा है। यहां संबंधित अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों को डिजिटल सर्वे की प्रक्रिया, मोबाइल एप के उपयोग और डेटा सत्यापन की तकनीकी जानकारी दी जा रही है।
नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। डिजिटल डेटा सत्यापन के माध्यम से ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पात्र किसानों को मुआवजा राशि बिना अनावश्यक प्रशासनिक देरी के सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच सकेगी। इससे दावों के निपटारे में पारदर्शिता और तेजी आएगी। इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल खरीद, खाद एवं बीज सब्सिडी और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ भी अधिक सटीक और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचाया जा सकेगा। डिजिटल रिकॉर्ड होने से पात्र किसानों की पहचान आसान होगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में गड़बड़ियों की संभावना कम होगी। सरकार को भी इस परियोजना से बड़ा लाभ मिलेगा। AI और सैटेलाइट तकनीक के जरिए राज्य में विभिन्न फसलों के उत्पादन का अग्रिम और सटीक अनुमान मिल सकेगा। इससे बाजार प्रबंधन, भंडारण, निर्यात नीति और कृषि से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण निर्णय समय पर लेने में सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल हरियाणा में डिजिटल और स्मार्ट कृषि व्यवस्था को नई दिशा देने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा सकती है।




