पंजाब

पंजाब सरकार करेगी बेअदबी कानून में संशोधन पर विचार

पंजाब सरकार द्वारा पारित नए बेअदबी कानून को लेकर सोमवार को श्री अकाल तख्त साहिब में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस दौरान आम आदमी पार्टी के कई मंत्री, विधायक और पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे। सभी नेता नंगे पैर अकाल तख्त सचिवालय में पहुंचे और जत्थेदार के समक्ष अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान धार्मिक, संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। यह मामला पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक संस्थाओं के बीच समन्वय के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सुनवाई के बाद कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब सरकार को बेअदबी कानून में आवश्यक संशोधन करने के लिए एक महीने का समय दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून में जिन बिंदुओं पर धार्मिक और कानूनी आपत्तियां उठाई गई हैं, उन्हें दूर किए बिना इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए। जत्थेदार ने कहा कि सरकार को सिख समुदाय की भावनाओं और श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा का सम्मान करते हुए संशोधित प्रस्ताव तैयार करना चाहिए।

पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सुनवाई के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के साथ सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण माहौल में चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान हुई बातचीत धार्मिक मर्यादा से जुड़ी हुई है, इसलिए उसकी गोपनीयता बनाए रखना उचित होगा। सरकार श्री अकाल तख्त द्वारा सुझाए जाने वाले सभी संशोधनों का गंभीरता से अध्ययन करेगी।

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि जत्थेदार द्वारा प्रस्तावित संशोधन विधानसभा स्पीकर के माध्यम से सरकार को भेजे जाएंगे। सरकार और विधायकों की ओर से इन सभी सुझावों का कानूनी परीक्षण किया जाएगा और एक महीने के भीतर इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए आगे की कार्रवाई करेगी।

बैठक के दौरान जत्थेदार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के उन सार्वजनिक बयानों पर भी सवाल उठाए जिनमें उन्होंने कहा था कि यदि कोई मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति बेअदबी करता है तो उसके माता-पिता या अभिभावकों को सजा दी जाएगी। जत्थेदार ने पूछा कि क्या ऐसी कोई व्यवस्था वास्तव में कानून में शामिल है। इस सवाल पर मौजूद कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां स्पष्ट जवाब नहीं दे सके, जिसके बाद इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई।

विधायक इंद्रबीर सिंह निज्जर ने सुनवाई की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए इसकी लाइव स्ट्रीमिंग न किए जाने की बात कही। इस पर जत्थेदार ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री स्वयं पहले सरकारी कार्यवाहियों के लाइव प्रसारण की वकालत कर चुके हैं। इस टिप्पणी के बाद बैठक में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी चर्चा हुई।

जत्थेदार ने यह भी कहा कि सरकार को कानून बनाने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन जब मामला सिख समुदाय की धार्मिक आस्थाओं और संस्थाओं से जुड़ा हो तो श्री अकाल तख्त साहिब, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और अन्य प्रमुख सिख संगठनों से औपचारिक सलाह लेना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों में सभी पक्षों को साथ लेकर निर्णय लेना ही उचित प्रक्रिया है।

कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने भी इस विषय का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने विधानसभा में पहले ही सरकार को इस संबंध में आगाह किया था और धार्मिक संस्थाओं से व्यापक परामर्श लेने की आवश्यकता बताई थी। उनका कहना था कि ऐसे संवेदनशील मामलों में जल्दबाजी से विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।

सुनवाई से पहले कार्यकारी जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने सिख संस्थाओं और खालसा पंथ की राय लिए बिना कानून में बदलाव कर धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को भविष्य में ऐसे किसी भी निर्णय से पहले धार्मिक संस्थाओं से संवाद स्थापित करना चाहिए ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

बैठक के समापन के बाद आम आदमी पार्टी के मंत्रियों और विधायकों ने श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि वे जत्थेदार द्वारा दिए गए सुझावों और निर्देशों का पूरा सम्मान करेंगे। सरकार धार्मिक भावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कानून में आवश्यक संशोधन पर विचार करेगी और निर्धारित समय के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करेगी।

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