उत्तराखंड

कुमाऊं रेजीमेंट से जुड़ाव का किया जिक्र, बोले- ‘जय मां कालिका’ से मिलता है साहस

उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) रविवार को अपने पिथौरागढ़ दौरे के दौरान मुनस्यारी से गंगोलीहाट पहुंचे। यहां उन्होंने प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक मां हाट कालिका मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। राज्यपाल के मंदिर पहुंचने पर मंदिर समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। मंदिर दर्शन के दौरान राज्यपाल ने मां हाट कालिका के समक्ष प्रदेश की उन्नति, शांति और विकास के लिए प्रार्थना की। उन्होंने मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों से भी मुलाकात की तथा क्षेत्र की समस्याओं, विकास कार्यों और पर्यटन संभावनाओं को लेकर संवाद किया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने मां हाट कालिका मंदिर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों के साथ बैठक कर मंदिर की व्यवस्थाओं, श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत राज्य की सबसे बड़ी पहचान है। ऐसे धार्मिक स्थलों का संरक्षण और सुनियोजित विकास न केवल आस्था को मजबूती देता है बल्कि स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करता है।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने अपने सैन्य जीवन को याद करते हुए कहा कि भारतीय सेना में लगभग चार दशक की सेवा के दौरान उनका कुमाऊं रेजीमेंट से गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा कि “जय मां कालिका” का उद्घोष सदैव सैनिकों के साहस, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत करता रहा है। मां कालिका की कृपा से भारतीय सैनिकों ने देश की सीमाओं की रक्षा और राष्ट्र की एकता-अखंडता बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि मां हाट कालिका के दरबार में उपस्थित होकर उन्हें विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक शांति का अनुभव हुआ है। यह स्थान केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व का भी प्रतीक है।

राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पिथौरागढ़ जिला आज पर्यटन और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह जिले की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक महत्व और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की दिव्य संस्कृति, हिमालयी सौंदर्य और आध्यात्मिक शक्ति देश-विदेश के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से धार्मिक पर्यटन को और अधिक विकसित किया जा सकता है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिक अवसर भी प्राप्त होंगे।

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