देहरादून: उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार आधुनिक तकनीक और नए प्रयोगों पर जोर दे रही है। संस्कृत को केवल शैक्षणिक विषय तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों, युवाओं और बच्चों के दैनिक जीवन से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् के शासी निकाय की तीसरी बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने की। बैठक में संस्थान की गतिविधियों, वार्षिक बजट और संस्कृत भाषा को व्यापक स्तर पर लोकप्रिय बनाने के लिए किए जाने वाले प्रयासों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संस्कृत सीखने की प्रक्रिया को सरल, रोचक और आधुनिक बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें।
संस्कृत सीखने के लिए तैयार होगा ‘आदर्श संस्कृत ग्राम मॉडल’
बैठक में संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से ‘आदर्श संस्कृत ग्राम मॉडल’ विकसित करने को कहा। इसके माध्यम से गांवों में संस्कृत के उपयोग और सीखने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में काम किया जा सकेगा। इसके साथ ही संस्कृत शिक्षकों की दक्षता बढ़ाने के लिए ‘कौशल विकास मॉडल’ तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। इसका उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे प्रभावी तरीके उपलब्ध कराना है, जिनसे वे बच्चों और अन्य शिक्षार्थियों को संस्कृत अधिक आसानी से सिखा सकें।
पहाड़ी क्षेत्रों में समर कैंप से जुड़ेगा संस्कृत का प्रचार
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में संस्कृत के प्रसार के लिए गर्मियों की छुट्टियों में आयोजित होने वाले समर कैंप को नियमित गतिविधि के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया गया। इसके तहत स्कूली बच्चों के लिए शैक्षणिक टूर और विशेष कैंप आयोजित किए जा सकते हैं। इन गतिविधियों के जरिए बच्चों को संस्कृत भाषा के साथ उत्तराखंड की संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को करीब से समझने का अवसर मिल सकता है। इससे पहाड़ी इलाकों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है। मुख्य सचिव ने आदर्श संस्कृत ग्रामों को राज्य के प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों से जोड़ने पर भी जोर दिया। इससे उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को देवभूमि की संस्कृत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को जानने का अवसर मिल सकेगा।
वेबसाइट, मोबाइल ऐप और सोशल मीडिया से जुड़ेंगे युवा
डिजिटल दौर में युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए संस्कृत संस्थान की वेबसाइट पर सरल और इंटरैक्टिव ऑनलाइन शिक्षण मॉड्यूल विकसित करने की बात कही गई। इसके अलावा संस्कृत को रोचक तरीके से प्रस्तुत करने के लिए छोटी वीडियो रील्स, मोबाइल ऐप और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ाने के निर्देश दिए गए। इन प्रयासों का उद्देश्य संस्कृत सीखने को अधिक सुलभ बनाना है, ताकि लोग अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन माध्यमों से भी भाषा का अभ्यास कर सकें। डिजिटल कंटेंट के जरिए संस्कृत को युवाओं की रुचियों और आधुनिक जीवनशैली से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।
वैदिक गणित और वेद अध्ययन जैसी गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा
मुख्य सचिव ने संस्कृत की व्यावहारिक उपयोगिता को सामने लाने के लिए विभिन्न गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया। बैठक में मंत्र चिकित्सा, वैदिक गणित, वेद अध्ययन केंद्रों और विभिन्न सेमिनारों जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही संस्थान की ओर से आयोजित प्रतियोगिताओं में लोगों की बढ़ती भागीदारी पर संतोष व्यक्त किया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि संस्कृत को अधिक व्यापक स्तर पर लोकप्रिय बनाने के लिए इन प्रयासों को और गति दी जानी चाहिए।
बैठक में कई अधिकारी रहे मौजूद
उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् के शासी निकाय की इस बैठक में संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार, अपर सचिव नवनीत पांडेय सहित निकाय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में लिए गए सुझावों और निर्देशों के माध्यम से राज्य में संस्कृत भाषा के शिक्षण, प्रचार-प्रसार और आधुनिक माध्यमों से जनसामान्य तक इसकी पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया।